पार्श्वनाथ जैसा कोई तपधारी रे | By Pooja Srivastava
पार्श्वनाथ जैसा न कोई तपधारी रे
कोई तपधारी रे न कोई तपधारी रे
पार्श्वनाथ जैसा न कोई व्रतधारी रे
पार्श्वनाथ जैसा ।।।।
कर्म शत्रु जब तुमसे हारा
तुमने ही किया जग का निस्तारा रे
पार्श्वनाथ जैसा न कोई तपधारी रे
पार्श्वनाथ जैसा।।।।।
नवकार मंत्र जब तुमने सुनाया
नाग और नागिन की किया सुखहारी रे
पार्श्वनाथ जैसा न कोई तपधारी रे
पार्श्वनाथ जैसा।।।।।
काशी के तुम स्वामी जी कहाय
अपने मन इच्छा से करे फलहारी रे
पार्श्वनाथ जैसा न कोई तपधारी रे
पार्श्वनाथ जैसा।।।।।
पार्श्वनाथ जैसा न कोई तपधारी रे
कोई तपधारी रे न कोई तपधारी रे
पार्श्वनाथ जैसा न कोई व्रतधारी रे
पार्श्वनाथ जैसा ।।।।
Parshvnath Jaisa Koi Tapdhari Re By Pooja Srivastava