सुण उड़ी बात नई री कीर्तन में | By Narendra Kaushik |

पा पागल गई री कीर्तन में
सुण उड़ी बात नई री कीर्तन में

बाबा का दरबार लग्या था
देसी घी का दीप जग्या था
ओ सबने महक गई री कीर्तन में
सुण उड़ी बात नई री कीर्तन में

जय बजरंग की सारे बोले
एक सबर था, प्यार न बोले
ओ जय-जय गूंज रही री कीर्तन में
सुण उड़ी बात नई री कीर्तन में

हो जब ऊड़ अर्ज़ी लावण लागे
अपणा रोज कटावण लागे
बाबा ने दी पोल वही कीर्तन में
सुण उड़ी बात नई री कीर्तन में

देके गयौं पाती के ढंग ने
ओ छांव में भरके बलवान सिंह ने
दो-तीन बात कही री कीर्तन में
सुण उड़ी बात नई री कीर्तन में

Sun Ude Baat Nayi Re Kirtan Me | By Narendra Kaushik |

Pa Pagal Gayi Re Kirtan Me
Sun Udi Baat Nayi Re Kirtan Me

Baba Ka Darbar Lagya Tha
Desi Ghee ka deep Jagya Tha
O Sabne Mahek Gayi Ri Kirtan Me
Sun Udi Baat Nayi Re Kirtan Me

Jai Bajrang Ki Saare Bole
Ek Sabar Tha Pyar Na Bole
O Jai Jai Gunj Rahi Re Kirtan Me
Sun Udi Baat Nayi Re Kirtan Me

Ho Jab Ud Arji Laawan Laage
Apna Roj Katawan Laage
Baba Ne Di Pol Wahi Kirtan Me
Sun Udi Baat Nayi Re Kirtan Me

Deke Gayon Pati Ke Dhang Ne
O Chaaw me Bharke Balwan Singh Ne
Do Tin Baat Kahi Ri Kirtan Me
Sun Udi Baat Nayi Re Kirtan Me

 

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